एकजुट होजाएं और समृद्धि के लिए मतदान करें

लंबे समय से, हमने मतदान के मायने नहीं समझे हैं। एक स्तर पर, हमारा मतदान करना तर्कहीन है। हमारे एक मतदान से चुनाव में वास्तव में कोई बदलाव नहीं आएगा- जब तक दोनों उम्मीदवार एक समान वोट प्राप्त करते हैं और आप अपने मतदान से चुनाव का परिणाम बदल सकते हैं। सामान्य रूप में हमारा एक मतदान किसी को जीत दिला सकता है या किसी की हार का बड़ा कारण बन सकता है।

फिर लोग वोट क्यों करते हैं? इसके कई कराण हैं। मेरे अनुसार, इसके दो मुख्य कारण हैं-कर्तव्य की भावना व प्रत्यक्ष निजी लाभ की आशा। पहले मामले में, चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों का अध्ययन करना, विभिन्न मुद्दों पर उनकी स्थिति को समझना और फिर निर्णय करना महत्वपूर्ण है। लेकिन वास्तव में हम पार्टी के चुनाव चिन्ह के आधार पर ही मतदान करते हैं(पार्टी के प्रति ईमानदारी के कारण)। चुनान के कुछ दिनों पहले राजनीतिक पार्टी के उच्च पदाधिकारियों द्वारा यह उम्मीदवार हम पर थोप दिए जाते हैं।

हमारे पास बहुत ही कम या ना के बराबर समय रहता है उम्मीदवारों के बारे में जानने के लिए। कुछ मामलों में उम्मीदवार स्थानीय निवासी भी नहीं होते हैं।

दूसरे मामले में, मतदान का कारण बहुत आसानी से समझा जा सकता है कि – यह एक लेनदेन है। यह मौद्रिक हो सकता है – मतदान के पहले और / या बाद में नकद भुगतान के रूप में। यह या तो धमकी या सुरक्षा का वादा हो सकता है। या पहचान की अभिव्यक्ति हो सकता है। इन सभी मामलों में स्वयं के हित के लिए मतदान किए जाते हैं।

नयी दिशा मतदान के पीछे के आंकड़ों और तर्क को समझती है। दो-तिहाई मतदाता(67 करोड़ मतदाता) किसी भी पार्टी के प्रति वफादार नहीं हैं। इनमे उन गैर मतदाताओं का समावेश हैं जिनमें- अनिश्चित मतदाता और वह मतदाता शामिल हैं जो अपने मतदान किसी छोटे दलों या स्वतंत्र उम्मीदवारों को देते हैं, जिनकी जीतने की उम्मीद कम होती है। इन दो-तिहाई बहुमत से ही अगले चुनाव में परिवर्तन लाने का अवसर है।