भारत के लिए एक नयी दिशा

साल भर या उस से भी कम समय में देश में चुनाव होने को हैं। इसके मद्देनजर पाकिस्तान, ध्रुवीकरण और निश्चित रूप से सबसे पुराना और लोकप्रिय मुद्दा ‘गरीबी’ एक बार फिर ज़ोरो-शोरों से चर्चा में रहेगा।

साल भर या उस से भी कम समय में देश में चुनाव होने को हैं। इसके मद्देनजर पाकिस्तान,ध्रुवीकरण और निश्चित रूप से सबसे पुराना और लोकप्रिय मुद्दा ‘गरीबी’ एक बार फिर ज़ोरो-शोरों से चर्चा में रहेगा। लेकिन जरा सोचिए यदि हम इन राजनेताओं के खेल पर पानी फेर,आगामी चुनाव को एक नए मुद्दे, ‘समृद्धि’ के बारे में बना दें तो?

लंबे समय से भारतीय समृद्धि से वंचित रहे हैं। भारतीयों की तुलना में औसतन अमेरिका वासियों की आय 30 गुना, साउथ कोरियों की 15 गुना, पुर्तगाल व ग्रीकवासियों की 10 गुना तथा चीनियों की 5 गुना अधिक है। आखिरकार हम भारत में समृद्धि निर्माण करने में सक्षम क्यों नहीं है?

Income Gap Between Countries

भारतीय गरीब क्यों है?

इसका जवाब हमारे द्वारा गरीबी से निपटने के लिए किए जाने वाले विशेष कार्यों में ही है। सभी प्रयास “गरीबी उन्मूलन” पर हैं- ‘गरीबी हटाओ’ से लेकर उसके आधुनिक रूपों तक। गरीबी दुनिया में डिफ़ॉल्ट स्थिति में है। यहां सबसे बड़ा सवाल यह है- ‘संपत्ति का सृजन कैसे हो?’ समृद्धि के लिए कार्य करने की आवश्यकता है, गरीबी की नहीं।

गरीबी पर ध्यान केंद्रित करके, सरकारें अपनी सृजन क्षमता को सक्षम करने के बजाय संपत्ति का दुरूपयोग करती है। अनावश्यक पाबंदियों के कारण समृद्धि को बढ़ावा नहीं मिला और गरीबी कायम रही। जनता के आम कार्य समृद्धि पर ध्यान केंद्रित करते हैं लेकिन ज्यादातर सरकारी हस्तक्षेप उनके मार्ग में बाधाएं डालती हैं।

लंबे वक्त से भारतीय सरकारों ने गलत विचारों और आर्थिक मॉडलों पर ध्यान केंद्रित किया। वर्तमान में भारतीयों को 10 गुना अमीर होना चाहिए था- लेकिन वे नहीं हैं। भारतीय सरकारों ने भारतवासियों के 90 प्रतिशत संपत्ति को चुरा लिया है।

वह नया मार्ग क्या है?

एक नया मार्ग है जो भारतीयों को समृद्ध बना सकता है। यह है “धन वापासी” यानी कि जनता को सार्वजनिक धन की वापसी। प्रत्येक भारतीय परिवार का सार्वजनिक संपत्ति में 50 लाख रुपये से अधिक हिस्सा है- लेकिन यह भूमि, सार्वजनिक क्षेत्रक उपक्रम,खनिज संपदा और अन्य तरह के दुरूपयोगों के कारण सरकार के नियत्रंण में है। धन से ही धन में वृद्धि होती है। हर भारतीय परिवारों को प्रतिवर्ष 1लाख रूपए लौटाया जा सकता है, साथ ही टैक्स की दरों को भी कम किया जा सकता है।

भारत को इसी तरह के बदलाव की आवश्यकता है। बदलाव हमसे ही शुरू होता है। जब हम समृद्धि के लिए आवश्यक मार्ग को समझना शुरू करेंगे, तभी राजनेता हमारी मांगों को पूरा करने के लिए अपने कार्य करने के तरीकों को बदलेंगे। नयी दिशा का यही मुख्य लक्ष्य है। एक साथ मिलकर हम आगामी चुनाव को समृद्धि की दिशा में ले जा सकते हैं और समृद्धि विरोधी मशीन का खात्मा कर सकते हैं। साथ मिलकर हम देश के पहले समृद्धि प्रधानमंत्री का चयन कर सकते हैं।

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हमारा नया लक्ष्य

जब हमने कुछ महीने पहले NayiDisha.com लॉन्च किया, तो हमने एक आर्थिक घोषणापत्र और एक राजनीतिक मंच से इसकी शुरुआत की थी। लेकिन हमने महसूस किया कि राजनीतिक मंच नयी दिशा के विचारों को समझने और इसका विस्तार करने में आड़े आ रहा है। इसलिए हम राजनीतिक मंच के विचार को छोड़ कर, नयी दिशा के मुख्य लक्ष्य समृद्धि, विशेष रूप से धन वापासी के विचारों को फैलाएंगे।

आगे हम आपको धन सृजन के महत्व को समझाएंगे। सत्ता में आसीन लोगों के कार्यों को समझने के लिए हम आप को पब्लिक चॉइस थ्योरी के बारे में विस्तार से बताएंगे। हम आर्थिक स्वतंत्रता के महत्व पर गहन चर्चा करेंगे। हम सरकार की सही भूमिका को समझने में आपकी सहायता करेंगे – सरकार को क्या करना चाहिए,और क्या नहीं इसके बारे में भी। हम यह भी दिखाएंगे कि कैसे नयी दिशा के पांच समृद्धि सिद्धांत और पांच शुरुआती समाधान वास्तव में भारत को समृद्धि के नए रास्ते पर ले जा सकते हैं।