यूपी-बिहार उपचुनाव (भाग 2) – भाजपा के लिए 3 सबक और एक चेतावनी

पिछले कॉलम और वीडियो में हमने 3 विजेताओं पर चर्चा की- मायावती, राजद और जाति तथा 3 हारने वाले- नीतीश, कांग्रेस और भाजपा। इस कॉलम में हम भाजपा को मिले 3 सबकों के बारे में चर्चा करेंगे- उसे 50 प्रतिशत वोटशेयर की आवश्यकता है, जो विभाजन से हासिल नहीं होगा और इसलिए उन्हें समृद्धि को लक्ष्य बनाना होगा।

पिछले कॉलम और वीडियो में हमने 3 विजेताओं पर चर्चा की- मायावती, राजद और जाति तथा 3 हारने वाले- नीतीश, कांग्रेस और भाजपा। इस कॉलम में हम भाजपा को मिले 3 सबकों के बारे में चर्चा करेंगे- उसे 50 प्रतिशत वोटशेयर की आवश्यकता है, जो विभाजन से हासिल नहीं होगा और इसलिए उन्हें समृद्धि को लक्ष्य बनाना होगा। 2014 के चुनाव अभियान में नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए वादों को याद दिलाने के लिए यह एक चेतावनी भी है जो वह भूल गए हैं, लेकिन मतदाता नहीं।

3 सबक

भाजपा को जरूरत है 50% वोटशेयर की …:

2014 के चुनाव में, हममें से कुछ लोग जो चुनाव अभियान में शामिल थे, बात करते थे कि अधिक सीटों पर जीत हासिल करने के लिए भाजपा को उत्तर प्रदेश में 40 प्रतिशत से अधिक वोटशेयर की आवश्यकता होगी। उसने वैसा ही किया। पर अब खेल बदल गया है। गैर-भाजपा पार्टियों के सामने अपने अस्तित्व को बनाए रखने की चुनौती है- या तो वे गठबंधन करें या नष्ट हों जाए। भाजपा की वर्तमान धारणा रहेगी कि वह 2014 में जीती हुई अधिकांश सीटों पर सिर्फ एक विपक्षी उम्मीदवार का सामना करे। यदि विपक्षी संगठित ढंग से कार्य करते हैं तो फर्स्ट पास्ट द पोस्ट काम नहीं आएगा। इसका मतलब भाजपा को अब बहुमत से जीत हासिल करने का लक्ष्य बनाना होगा- 50 प्रतिशत या उससे ज्यादा। भाजपा ने 2014 में 282 में से जीती हुई 141(यानी ठीक आधी) सीटों पर यही किया था।

…जो विभाजन से प्राप्त नहीं हो सकता …:

50 प्रतिशत या उससे अधिक वोटशेयर भाजपा जाति, समुदाय या वर्ग को विभाजित कर हासिल नहीं कर पाएगी। अतीत में खेला गया दाव भविष्य में दिशा प्रदान नहीं कर सकता। वे सिर्फ वादे करने के लिए भी सक्षम नहीं होंगे। इसका फैसला अब इनके केंद्र तथा सत्तारूढ़ राज्यों में किए गए कार्यां के आधार पर तय किया जाएगा। नरेंद्र मोदी वोट कैचर हैं हालांकि अब उनका करिश्मा कम हो गया है। ध्रुवीकरण और बंटवारे की राजनीति, भाजपा द्वारा उम्मीद की गई सीटों को बहुमत से जीतने के लिए प्रभावी साबित नहीं हो सकती।

… इसलिए उन्हें समृद्धि को लक्ष्य बनाना होगा:

भाजपा को न केवल अपने संदेशों में बल्कि अपने कार्यों में भी समृद्धि को बढ़ावा देना होगा। समृद्धि एक सुखी और बढ़ते हुए राष्ट्र की कुंजी है। समृद्धि गैस सिलेंडर, बिजली कनेक्शन, बैंक खाता, बीमा योजना या ऋण माफी नहीं है। समृद्धि लोगों को एक बेहतर जीवन के लिए स्वयं चुनाव करने की स्वतंत्रता देने में है। समृद्धि धन सृजन में आनेवाली सभी बाधाओं को दूर करने में है। समृद्धि उस मशीन को नष्ट करने में है, जिसने भारतीयों को 70 सालों से गरीब रखा है। समृद्धि सभी राजनीतिक पार्टियों के तिकड़म बाजियों पर पानी फेर सकती है, यह ‘मंडल’ और ‘मंदिर’ को हरा सकती है। बहुत जल्द भारत में चुनाव आर्थिक मुद्दो पर लड़े जाएंगे, साथ ही मतदाता यह पूछेंगे कि ‘हमारे लिए इसमे क्या है?’ शिक्षा, स्वास्थ्य, श्रम, भूमि, कृषि, नौकरशाही, पुलिस, न्यायपालिका के साथ निजीकरण, अविनियमन और शहरों के अधिकारों के हस्तांतरण में वास्तविक और संरचनात्मक सुधार भारत को बदल सकते हैं और भारतीयों को समृद्ध बना सकते हैं। नरेंद्र मोदी की भाजपा अभी भी लोकसभा में बहुमत हासिल कर सकती है यदि अपने बचे हुए कार्यकाल में वे इन बातों को बढ़ावा दें।

1 चेतावनी

लोगों से बात करें और उनसे 2014 के चुनाव अभियान में नरेंद्र मोदी द्वारा किए गए किसी विशेष वादे के बारे में पूछा जाए तो सभी का अवश्यंभावी जवाब होगा ‘हर गरीब परिवार को 15 लाख रूपये’। उनके लिए इसका मतलब था विकास कार्य, समृद्धि, अच्चे दिन और एक बेहतर कल। कोई भी मायाजाल या जुमला जमीनी स्तर पर परिणामों की कमी तथा विकास कार्यों की सच्चाई को छुपा नहीं सकता।

15 लाख रूपये का वादा आम जनता के लिए कभी भी कोई चाल नहीं थी, बल्कि उनके लिए नए जीवन के लिए स्वतंत्रता हासिल करने का एक रास्ता था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हाल के चुनाव में मतदाताओं ने बार-बार यही चेतावनी दी है।

**

नरेंद्र मोदी को अपने मौजूदा कार्यकाल में इस एक बात पर ध्यान देने की जरूरत है कि- वह भारतीयों से किए गए 15 लाख रुपयों के वादे की अपेक्षाओं को कैसे संतुष्ट कर सकते हैं। इस वादे पर ध्यान केंद्रित करते हुए उन्हें एक उद्यमी की तरह राजनीतिक स्टार्टअप की तरफ बढ़ना होगा, वे महत्वपूर्ण सुधारों को शुरू कर सकते हैं जिससे समृद्धि विरोधी मशीन का खात्मा हो सके। अगर नरेंद्र मोदी ऐसा नहीं करते हैं, तो हमें एकजुट होकर ऐसा करना होगा।

ऐसा हो सकता है और जल्द ही मैं आपको, मोदी को और हर वो उम्मीदवार को जो भारत का पहला समृद्धि प्रधानमंत्री बनना चाहता है बताऊंगा कि किस तरह 15 लाख रूपये के वादे को पूरा किया जा सकता है औऱ व किस तरह हमारी जिंदगी को परिवर्तित कर सकते हैं।