धन वापसी और समृद्धि-इसे संभव करना है

आज, दूरस्थ कार्यालयों में बैठे सरकारें यह तय कर रही हैं कि अलग-अलग परिवारों के लिए क्या अच्छा है। इसलिए कुछ सालों पहले उन्होंने मनरेगा योजना की शुरूआत की। उसके बाद उन्होंने ऋण में छूट दी।

आज, दूरस्थ कार्यालयों में बैठे सरकारें यह तय कर रही हैं कि अलग-अलग परिवारों के लिए क्या अच्छा है। इसलिए कुछ सालों पहले उन्होंने मनरेगा योजना की शुरूआत की। उसके बाद उन्होंने ऋण में छूट दी। फिर गैस सिलेंडर का वितरण किया गया और उसके बाद कुछ और ऋणों में छूटें दी गयी। इन सब के बाद बिजली कनेक्शन दिया जाएगा। शायद भविष्य में उन्हें एक सौर लालटेन दी जाएगी एवं और भी कर्ज माफी।

कुछ सालों में मुफ्त में मिलने वाली वस्तुएं जरूर बदल जाती हैं, लेकिन दो चीजें कभी नहीं बदली- गरीबी और गरीबी को वोटबैंक में बदलते रहने की राजनेताओं की इच्छा

क्या बदलने की जरूरत है?

राजनेताओं और नौकरशाहों की पितृसत्तावाद को खत्म करने की जरूरत है। धन वापसी दुर्गति के इस चक्र को खत्म करने के साथ -साथ लोगों को स्वतंत्रता और धन लौटाने के बारे में है।

धन वापसी- सभी भारतीयों के लिए



सभी भारतीयों को धन वापसी की एक तिथि मिलना जरूरी है-धन वापसी तिथि। आने वाले एक या दो साल में धन वापसी की प्रक्रिया शुरू होना आवश्यक है। क्योंकि हर बीतते साल के साथ, हम करोड़ों भारतीयों को विभिन्न अवसरों का लाभ उठाने तथा समृद्धि की तरफ उनके कदमों को बढ़ने से रोक रहे हैं।

धन वापसी की तुलना में जीवन में कोई बेहतर तुल्यकारक नहीं हो सकता है। भारतीय परिवारो के लिए धन वापसी से अच्छा कोई सुरक्षा कवच नहीं हो सकता। धन वापसी से अच्छी कोई शुरूआत नहीं हो सकती है।

धन वापसी सार्वभौमिक होनी चाहिए क्योंकि हर भारतीय परिवार का भारत की संपत्ति में हिस्सा है। प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष 1 लाख रूपये की वापसी- विभिन्न अवसरों, धन सृजन और समृद्धि के मार्ग पर बढ़ने के लिए पर्याप्त है। लोगों के हाथों में अधिक से अधिक धन होने पर वे अपनी इच्छानुसार उसका उपयोग कर सकते हैं या बचत कर सकते हैं। देश भर में यह मांग उद्यमियों और उद्यमों द्वारा पूरी की जाएगी जो नई नौकरियां पैदा करेंगे। आय में वृद्धि से कृषि आय में भी वृद्धि होगी।

धन वापसी कैसे संभव है?

इसकी शुरूआत कल से की जाती है। इसके लिए आवश्यकता है तो बस सकारात्मक सोच और कार्य करने की इच्छा। हमें यह बात समझने की जरूरत है कि गरीबी हटाओं से लेकर विभिन्न योजनाएं असफल रही है। देश में समृद्धि लाने के लिए एकमात्र ज़रिया है-सरकार का सीमित हस्तक्षेप कर आम जनता को अधिक स्वतंत्रता प्रदान करना।

धन वापासी पर और पढ़ें: भारतीयों का सार्वजनिक धन कहां है?

सच्चाई यह है कि सभी राजनेता और दल एक समान प्रवृत्ति के हैं – इसी कारण स्वतंत्रता के 70 साल बाद भी धन वापसी को अमल में नहीं लाया गया। वे, सभी संसाधनों को नियंत्रित कर, सरकार जो करती है उसका आकार व दायरा बढ़ा कर और चुनिंदा वितरण द्वारा दरियादिली दिखाकर अपने लिए वोट व कमीशन बटोर रहे हैं।

यदि वर्तमान सरकार या पार्टियां नहीं तो कौन?

इस स्थिति में भारत को जरूरत है एक नए राजनीतिक स्टार्टअप की, जिसके पास अतीत की कोई विरासत ना हो। जिस तरह प्रौद्योगिकी की दुनिया में स्टार्टअपों के माध्यम से लाखों भारतीयों को लाभ मिला है उसी तरह अब समय है राजनीतिक स्टार्टअप के माध्यम से राजनीति में परिर्वतन लाने का।

एक ऐसा स्टार्टअप जिसका मुख्य लक्ष्य हो- समृद्धि को बढ़ावा देने वाली सरकार का गठन करना। एक ऐसा स्टार्टअप जो जरूरतमंदों को स्वतंत्रता, संपत्ति और शक्ति दे-भारतवासियों को।

इस संधि और गठबंधन की भारत को आवश्यकता है-जो एक ही मुद्दे पर लोगों को एकजुट करें। समृद्धि विरोधी मशीन का खात्मा कर, भारत के पहले समृद्धि प्रधानमंत्री का चयन करना, जो धन वापसी को अमल में लाए।