एक पेंसिल की आत्मकथा- लियोनार्ड ई. रीड

अमेरिकी अर्थशास्त्री लियोनार्ड ई. रीड का निबंध ‘आई, पेंसिल’ (एक पेंसिल की आत्मकथा) अर्थशास्त्रियों के बीच हमेशा ही चर्चा का विषय रहा है। नयी दिशा के पाठकों के लिए ‘आई, पेंसिल’ का हिंदी अनुवाद ‘एक पेंसिल की आत्मकथा’ प्रस्तुत है। आज पढ़िए इसका पहला भाग-

विश्व के उदारवादी अर्थशास्त्रियों में लियोनार्ड ई. रीड का नाम उल्लेखनीय है। लियोनार्ड ई. रीड ने सन 1946 में ‘द फाउंडेशन फॉर इकोनॉमिक एजुकेशन’ की स्थापना की जो अमेरिका में अपनी तरह की पहली आधुनिक उदारवादी अर्थशास्त्र की संस्था थी। उन्होंने अनेकों निबंधों सहित 29 किताबें लिखीं जिनमें सन 1958 में लिखी गई ‘आई, पेंसिल’ (एक पेंसिल की आत्मकथा) बहुत ही सराही गई। यह निबंध लियोनार्ड ई. रीड के इस मूल विचार- ‘मानव स्वतंत्रता को निजी संपत्ति, मुक्त प्रतिस्पर्धा और गंभीर रूप से सीमित सरकार की आवश्यकता थी’ को फैलाने में बहुत ही प्रभावी रहा।         

इसके बारे में जानेमाने अर्थशास्त्री और ‘द फाउंडेशन फॉर इकोनॉमिक एजुकेशन’ के अध्यक्ष (अप्रैल 1998) डोनल्ड जे. बॉड्रॉक्स ‘आई, पेंसिल’ (एक पेंसिल की आत्मकथा) के बारे में लिखते हैं, “केवल कुछ ही पृष्ठों में सिमटे लियोनार्ड रीड का मशहूर निबंध यह आश्चर्यजनक तथ्य प्रस्तुत करता है कि मुक्त बाजार सचमुच लाखों लोगों की गतिविधियों को उत्पादन के कार्यों को सफलतापूर्वक समन्वयित करता है। इसे पढ़ने के बाद अर्थशास्त्र का नया विद्यार्थी भी यह समझ जाएगा कि किस तरह यह निबंध में केंद्रीय नियोजन या विनियमन की श्रेष्ठता के तर्क को खारिज कर देता है। अगर मुझे ऐसी कोई एक निबंध या पुस्तक चुनने के लिए कहा जाए जिसे दुनिया में हर किसी को पढ़ना चाहिए तो निश्चित रूप से मैं ‘आई, पेंसिल’ का नाम लूंगा।”

आज आप पढ़ेंगे इसका पहला भाग-

‘एक पेंसिल की आत्मकथा’

-लियोनार्ड ई. रेड

मैं एक लेड पेंसिल हूं- साधारण लकड़ी की पेंसिल, जिसे सभी पढ़ने-लिखने वाले लड़के, लड़कियां और बड़े लोग जानते ही हैं।

लिखना मेरी प्रवृत्ति और पेशा दोनों है। कुल मिला कर मैं यही काम करती हूं।

आपको हैरानी होगी कि मैं अपनी वंशावली क्यों लिख रही हूं? एक तो, मेरी कहानी शुरू से ही दिलचस्प है और दूसरे, मैं एक रहस्य हूं- पेड़ से कहीं ज्यादा, सूर्यास्त से अधिक और यहां तक कि बिजली की चमक से भी कहीं ज्यादा। लेकिन बड़े दुख की बात है कि मेरा इस्तेमाल करने वाले मुझे बहुत हल्के में लेते है जैसे मैं कोई मामूली चीज हूं और बिना किसी पृष्ठभूमि के। उनका यह बेरुखी भरा रवैया मेरे महत्व को घटा कर मुझे बहुत ही साधारण बना देता है। यह एक तरह से बहुत ही गंभीर गलती है जिसमें मानव जाति ज्यादा समय तक बगैर खतरे के टिकी नहीं रह सकती। बुद्धिजीवी जी.के. केस्टेरटोन की टिप्पणी है, “हम लोग बर्बाद हो रहे हैं किसी करिश्मे की चाहत में, न कि करिश्माओं की चाह में।”

भले ही मैं पेंसिल, दिखने में अति साधारण हूं मगर मैं दावा करती हूं कि मेरे गुण आपको अचंभित कर देंगे और मैं आपको ये साबित कर दिखाऊंगी। दरअसल, अगर आप मुझे समझ सकते हैं- नहीं, शायद आपसे यह कहना ज्यादा हो जाएगा- अगर आप उस जादूगरी को जान जाएंगे जिसकी मैं निशानी हूं तो आप मेरी स्वतंत्रता को बचाने में मदद कर सकते है जिसे मानव जाति दुखद रूप से खो रही है। मेरे पास सिखाने के लिए एक महत्वपूर्ण विषय है। और मैं इस विषय को ऑटोमोबाइल या हवाई जहाज या मेकेनिकल डिशवॉशर (बर्तन मांजने की मशीन) से बेहतर तरीके से सिखा सकती हूं क्योंकि दिखने में मैं बहुत ही सरल हूं।

सरल होते हुए फिर भी, इस धरती पर रहने वाला एक भी इंसान मुझे बनाना नहीं जानता। यह मजेदार लगता है, है ना? विशेष रूप से जब यह पता चले कि हर साल अमेरिका में मेरे जैसी डेढ़ अरब पेंसिलें बनती हैं।”

चलो हाथ में लो और मुझे देखो। आपको क्या दिखाई देता है? आंखों को ज्यादा कुछ नजर नहीं आता-  छोटी-सी लकड़ी, लाख, छपे हुए लेबल, ग्रेफाइट लेड, धातु का छोटा-सा टुकड़ा और एक रबर।

अनगिनत पूर्वज

जैसे आप अपने वंश-वृक्ष को बहुत पीछे तक नहीं देख सकते हैं, उसी तरह मेरे लिए मेरे इतिहास को समझाना नामुमकिन है। लेकिन आपको प्रभावित करने के लिए मैं अपनी पृष्ठभूमि की समृद्धि और जटिलता के बारे में काफी चीजें बताना चाहूंगी।

मेरा वंश-वृक्ष वास्तव में सीडर नामक सीधी धारियों वाले देवदार के पेड़ से शुरू होता है जो उत्तरी कैलिफ़ोर्निया और ओरेगन में उगता है। अब देवदार के पेड़ों की कटाई में लगने वाली सभी आरियों, रस्सी और अनगिनत अन्य उपकरणों और उन कटे हुए कुंदों को सड़कों के किनारे बने रेलमार्ग तक ले जाने के लिए माल ढुलाई में लगने वाले ट्रकों पर विचार करें। इन सबके निर्माण में लगे सभी लोगों और उनके अनगिनत कौशल के बारे में सोचें: देवदार पेड़ को काटने वाली आरी के निर्माण की प्रक्रिया में अयस्क का खनन, स्टील बनाना और उसे आरी, कुल्हाड़ी, मोटर में ढालना, रस्सी बनाने के लिए जूट-पटसन उगाना फिर उनसे मोटी और मजबूत रस्सी बनाने के सभी चरणों से गुजरना, इसी तरह मजदूरों के कैम्प व खाने की कैन्टीन, भोजन से भरे बर्तन। और हाथ में लकड़हारों के पेय- कॉफी के कप लिए हुए अनगिनत वे अनजाने हज़ारों लोग!

लकड़ी के ये कुंदे सैन लींड्रो, कैलिफोर्निया के एक मिल में भेज दिए जाते हैं। क्या आप उन व्यक्तियों की कल्पना कर सकते हैं जो फ्लैट कारें और रेल और रेलरोड इंजन बनाते हैं और इसके अलावा जो संचार प्रणालियों को बनाते हैं, एक-दूसरे को जोड़ते हैं और स्थापित करते हैं? ये सभी लोग मेरे पूर्वज हैं।

सैन लींड्रो में मिलवर्क पर विचार करें। देवदार के कुंदों को पेंसिल के आकार की एक चौथाई इंच की मोटाई वाली छोटी पट्टियों में काटा जाता है। इनको भट्टे में सुखाया जाता है और फिर रंगा जाता है, उसी कारण से महिलाएं अपने चेहरे के श्रृंगार के लिए इसे लगाती हैं। लोग सुंदर दिखने वाली पेंसिल पसंद करते हैं न कि बेरंग। इन पट्टियों को मोम लगाकर फिर से भट्टी में सुखाया जाता है। इन पेंसिलों को सुखाने, रंगने, गर्मी की आपूर्ति करने, गर्मी, प्रकाश और बिजली, बेल्ट, मोटर्स और मिल की अन्य चीजों की जरूरतों को पूरा करने में न जाने कितना हुनर लगता है? इन मिलों में झाड़ू लगाने वाले कर्मचारी भी मेरे पूर्वज हैं? और वे लोग भी हैं जिन्होंने पैसेफिक गैस और इलेक्ट्रिक कंपनी के हाइड्रोप्लांट बांध बनाने के लिए ईंट-पत्थर और कंक्रीट डाले। वहीं से मिल को बिजली की आपूर्ति की जाती है!

वर्तमान और दूर के पूर्वजों को नज़रअंदाज़ न करें जिनका साठ कार भरकर स्लेट पूरे देश में पहुँचाने में हाथ है।

एक बार जब पेंसिल फैक्ट्री में- मेरे माता-पिता द्वारा किफायत और बचत करके जमा किया गया सारा धन यानी तकरीबन 4,000,000 डॉलर मशीनरी और इमारत में लग जाता है, – प्रत्येक स्लेट में एक जटिल मशीन द्वारा आठ खांचे लगाए जाते हैं, जिसके बाद एक और मशीन से हर दूसरे स्लेट में लेड डाला जाता है, गोंद लगाई जाती है फिर उसके ऊपर एक और स्लेट लगा दी जाती है यानी कहा जाए लेड सैंडविच। “लकड़ी से जड़े” सैंडविच जैसे मुझे और सात भाइयों की मशीन से तराशा जाता है।

मेरी लेड भी बहुत जटिल हो गई, इसमें कोई लेड (सीसा) नहीं होता। यह ग्रेफाइट सिलोन [श्रीलंका] की खदानों में मिलता है। इन खनिकों और उनके औजार बनाने वाले, और कागज़ के थैलों में ग्रेफाइट भेजे जाते हैं उनके निर्माता और वे सुतलियां जिनसे बोरे से बांधे जाते हैं और जो उन्हें जहाज पर रखते हैं और जहाजों को बनाने वाले- उन सभी मजदूरों पर विचार करें। यहां तक कि बंदरगाह के नाविक और मेरे जन्म के लिए पूरे रास्ते सहायता करने वाले लाइटहाउस के रखवाले- ये सभी मेरे पूर्वज कहलाएंगे ।

ग्रेफाइट को मिसिसिपी से लाई गई मिट्टी में मिलाया जाता है जिसमें परिष्कृत प्रक्रिया में अमोनियम हाइड्रॉक्साइड का उपयोग किया जाता है। फिर गीले एजेंटों को जोड़ा जाता है जैसे सल्फोनेटेड चर्बी- पशु वसा रासायनिक रूप से सल्फरिक एसिड के साथ प्रतिक्रिया करता है। कई मशीनों से गुज़रने के बाद, मिश्रण अंततः अंतहीन उभार के रूप में प्रकट होता है- एक सॉसेज ग्राइंडर- जिसे आकार में काटने के बाद सुखाया जाता है और 1,850 डिग्री फारेनहाइट पर कई घंटे तक पकाया जाता है। उनकी ताकत और चिकनाई को बढ़ाने के लिए लेड के गर्म मिश्रण में मेक्सिको के कैंडलीला मोम, पैराफिन मोम, हाइड्रोजनीकृत प्राकृतिक वसा मिलाया जाता है।

मेरे सीडर देवदार पर लाख के छह कोट लगाए जाते हैं। क्या आप लाख के सभी तत्वों को जानते हैं? कौन सोच सकता है कि अरेंडी के बीज के उत्पादक और कैस्‍टर ऑयल के रिफाइनर इसका हिस्सा हैं? वे हैं। यहां तक कि जिन प्रक्रियाओं से लाख को एक खूबसूरत पीला रंग दिया जाता है, उनमें भी अनगिनत व्यक्तियों का हुनर शामिल रहता है!

लेबलिंग का निरीक्षण करें। यह रेजिन के साथ मिश्रित कार्बन ब्लैक को गर्म करके बनाई एक फिल्म है। आप रेजिन कैसे और किससे बनाते हैं, और ये काला कार्बन क्या है?

  • अगले भाग में आप पढ़ेंगे कि कैसे पेंसिल को उसका अंतिम रूप प्राप्त होता है!