भारत में स्वामित्व की समस्या का समाधान

जैसा कि आप लोगों ने स्वामित्व की समस्या भाग (भाग1, भाग2, भाग-3 और भाग 4) में देखा कि आय, संपत्ति और राष्ट्रीय संपदा पर स्वामित्व की कमी के कारण आज हम अपनी वास्तविक क्षमता से पीछे हैं।

जैसा कि आप लोगों ने स्वामित्व की समस्या भाग (भाग1, भाग2, भाग-3 और भाग 4) में देखा कि आय, संपत्ति और राष्ट्रीय संपदा पर स्वामित्व की कमी के कारण आज हम अपनी वास्तविक क्षमता से पीछे हैं। इसने हमारी उद्यमशीलता की क्षमताओं को बाधित किया है और दुनिया में भारतीयों को सबसे गरीबों की सूची में खड़ा कर दिया है। इस समस्या को हल करना आवश्यक है। खुशखबरी यह है कि इन तीनों समस्याओं का समाधान उपल्बध है।

सबसे पहले हम हमारी आय पर स्वामित्व की कमी पर चर्चा करते हैं। इसका समाधान है कि व्यक्तिगत आय, कॉर्पोरेट आय और वस्तु और सेवाओं पर लगने वाले करों की दरों को सीमित किया जाए। नयी दिशा का मानना है कि इस तरह के सभी करों को 10 प्रतिशत तक की सीमा में रखा जाए। जिससे आम जनता तथा कंपनियों के पास ज्यादा से ज्यादा धन होंगे। जब सरकार के बजाय आम जनता तथा देश की विभिन्न कंपनिया पैसे निवेश या खर्च करती हैं तब अर्थव्यवस्था मजबूत बनती है व रोजगार के नए अवसर उत्पन होते हैं। इसके अलावा करों की सीमा कम करने से सरकार द्वारा हो रहे अनुपयुक्त व्यय को भी कम किया जा सकता है। कर की दरों को कम कर, हम भारत को समृद्धि की दिशा में ले जाने के लिए एक कदम उठाएंगे।

अगली समस्या है- संपत्ति पर स्वामित्व की कमी का होना है। इस समस्या को हम तीन तरीकों से हल कर सकते हैं।

सबसे पहले, संपत्ति का अधिकार भारतीय संविधान में मौलिक अधिकार के रूप में बहाल किया जाना चाहिए; दूसरा, सभी संपत्ति के पास 3 साल के भीतर एक स्पष्ट शीर्षक (मालिकाना हक) होना चाहिए; और तीसरा, कृषि भूमि की बिक्री पर सभी प्रतिबंध हटा दिए जाने चाहिए।

आखरी है, सार्वजनिक संपत्ति पर आम जनता के स्वामित्व की कमी। इस विषय पर नयी दिशा के घोषणापत्र में विस्तार से बताया गया है कि हर भारतीय परिवारों को सार्वजनित संपत्ति में से प्रति वर्ष 1 लाख रूपये मिलना चाहिए। इस संपत्ति का एकत्रीकरण कई सालों से अनुपयुक्त और दुरूपयोग में लाई-गई सार्वजनिक संपत्ति का सही उपयोग में लाकर किया जा सकता है। सार्वजनिक संपदा देश के नागरिकों की है न कि सरकार की। सार्वजनिक संपदा आम जनता को जल्द से जल्द मिलना जरूरी है। जिससे वे खुद को समृद्ध बनाने की दिशा में काम करने के लिए आजाद हो सकते हैं।

सरकार से आम जनता को स्वामित्व स्थानांतरित करना देश को समृद्धि की दिशा में ले जाने के लिए पहला कदम होगा।