स्वास्थय तथा अन्य समस्याओं के लिए नयी दिशा का समाधान

जैसा कि हमने भाग-1 और भाग-2 में देखा राष्ट्रीय स्वास्थय सुरक्षा योजना के तहत 10 करोड़ भारतीयों को 5 लाख रुपये तक बीमा देने का वादा किया गया है। यह योजना कुछ और नहीं बल्कि कर दाताओं से पैसे वसूल कर सरकार के माध्यम से गरीबों को पैसे मुहैया करवाना है जिसका सीधा फायदा बीजेपी को चुनाव में मिले। इस योजना में लगने वाली भारी लागत के बारे आने वाले समय में पता चल सकता है, लेकिन तब तक लोकसभा चुनाव का आगाज हो चुका होगा।

फिर, स्वस्थ भारतीयों का लक्ष्य कैसे हासिल होगा?

सबसे पहले हमें यह जानना जरूरी है कि भारत सरकार आम जनता को न केवल अच्छा स्वास्थ देनें में असफल हुई है पर बड़ी संख्या में लोगों को शिक्षा प्रदान करने में भी असफल रही है। जिसके परिणामस्वरुप भारतीय परिवार अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा देने के लिए निजी स्कूलों और अच्छे उपचार के लिए निजी अस्पतालों में भेज रहे हैं। आम जनता अपने परिवार के हित के लिए वे सभी कार्य कर रहे हैं जो जरूरी है। यही सिद्धांत है जो स्वास्थ्य देखभाल और अन्य क्षेत्रों में मदद कर सकता है। कड़े आदेश देकर की बच्चों को कहां शिक्षा हासिल हो या किसके साथ कैसे बर्ताव किया जाए के बजाय हर भारतीयों को उनके हक के सार्वजनिक धन देने की जरूरत है और उन्हें अपने स्वंय के लिए निर्णय लेने का अधिकार होना जरूरी है। यही सिद्धांत नयी दिशा के घोषणापत्र में भी समझाया गया है।

देश में निष्क्रिय पड़ी संपत्तियों का उपयोग उत्पादन में लाकर तथा सरकारी व्यर्थ को कम कर देश के हर नागरिक को प्रति वर्ष 1 लाख रूपये देना चाहिए। हर परिवार को अपनी आवश्यकताओं पर प्राथमिकता के अनुसार खर्च करने की स्वतंत्रता हो। उन्हें निजी बीमा कंपनियों से बीमा खरीद उसके भुगतान के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। ताकि उन्हें उनके द्वारा लिए गए परिणाम की जानकारी हो। साथ ही उन्होंने इस बात की भी जानकारी मिलती है कि यदि उन्होंने अपने स्वास्थय योजनाओं का दुरूउपयोग किया तो आने वाले सालों में बीमा का भुगतान दुगुना हो सकता है।

जहां वस्तुओं की मांग होगी, वहां आपूर्ति भी होगा। यह भी संभव है कि कुछ अनैतिक लोग फायदा पाने की कोशिश करेंगे लेकिन बाजार में मूल्य निर्धारण तंत्र के माध्यम से स्वयं सुधार किया जा सकता है, जो इस समस्या का बेहतरीन हल है। जो नगरपालिका आम जनता के हित के लिए कार्य नहीं करती है वह व्यापार से बाहर निकल जाती है। सरकार को दिल्ली के लुटियंस से सभी निर्णयों पर नियत्रंण और आदेश देना बंद करना होगा। सरकार को आम जनता के साथ बच्चों की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए कि उनके लिए क्या जरूरी है और क्या नहीं बल्कि उन्हें आजादी देनी चाहिए कि वे खुद निर्णय लें कि उनके लिए क्या सही है।