नयी दिशा को सफलता की ओर ले जाते हुए

नयी दिशा मंच

भारतीयों को समृद्ध बनाने के लिए नयी दिशा एक राजनीतिक मंच है। इसका मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता, समानता और आम जनता को संपन्न बनाने के एजेंडे पर एकजुट करना है। नयी दिशा की समृद्धि सिद्धांत और मिशन 543 भारत में शासन और राजनीति के लिए एक नया मॉडल तैयार करेगा।

ऩयी दिशा उन मतदाताओं को एकजुट कर आगे बढ़ाना चाहती है, जो देश को समृध्द और विकास की ऩयी दिशा देने की चाह रखते हो। नयी दिशा का उद्देश्य चुनाव लड़कर लोकसभा में 543 सीटों के बहुमत से जीत हासिल करना है। जिससे नयी दिशा सरकार बनाकर भारत को समृध्द बनाने वाले अपने एजेंडे को पूरा कर सके।

अगले चुनाव में 543 सीटों पर बहुमत से जीत हासिल करने के लिए नयी दिशा निम्‍न बातों पर ध्‍यान दे रही है:

1. समर्थक: भारत के दो तिहाई मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करना जो मौजूदा राजनीतिक पार्टिंयों को पसंद नहीं करते हैं।
2. संदेश: प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति और भारत के भविष्‍य पर ध्‍यान केंद्रित करने के लिए सकारात्‍मक और सरल संदेश।
3. मंच: मौजूदा पदानुक्रमित राजनीतिक दलों को टक्‍कर देने के लिए लोगों के नेटवर्क से एक मंच तैयार करना।
4. प्रमुखता: उम्‍मीदवारों के चुनाव के लिए एक नया प्राइमरी बेस्‍ड मॉडल तैयार करना।

नयी दिशा के समर्थक

अगले चुनाव तक भारत में 100 करोड़ लोग वोट देने के योग्‍य होंगें। इनमें से एक तिहाई लोग मौजूदा राज‍नीतिक पार्टियों के प्रति ईमानदार हैं जबकि अन्‍य एक तिहाई वोट ना करने वाले लोग हैं और बाकी के लोग उन उम्‍मीदवारों को वोट करते हैं जिनकी जीत की संभावना कम होती है या छोटे और आत्‍मनिर्भर उम्‍मीदवारों को वोट करते हैं।

भारतीय किसके लिए मतदान करते हैं?
आगामी 2019 के लोक सभा चुनाव के लिए 100 करोड़ मतदाता तैयार हैं जिनमें से एक तिहाई यानि की 33 करोड़ लोग राजनीतिक पार्टियों का समर्थन करते हैं। आइए मतदाताओं के ‘संगठित क्षेत्र’ पर एक नज़र डालते हैं :

  • 17 करोड़ बीजेपी के लिए
  • 8 करोड़ कांग्रेस के लिए
  • 8 करोड़ क्षेत्रीय दलों के लिए
  • इन मतदाताओं की ईमानदारी उम्‍मीदवारों से ज्‍यादा राजनीतिक पार्टियों के प्रति है। इसका मतलब है कि जिन उम्‍मीदवारों को मतदाताओं की पसंदीदा पार्टियों ने चुना है वे उन्‍हें ही वोट करेंगें। ऐसे लोगों के मत को लेकर राजनीतिक पार्टियां काफी आश्‍वस्‍त रहती हैं एवं ये नयी दिशा की पहुंच के बाहर हैं।

    बाकी बचे 67 करोड़ योग्‍य मतदाता, इनमें नयी दिशा को रुचि है। आइए मतदाताओं के ‘असंगठित क्षेत्र’ पर एक नज़र डालते हैं :

  • आधे मतदाता का पंजीकरण नहीं हुआ है या वे वोट डालने नहीं आते हैं।
  • आधे मतदाता आखिरी मिनट पर तय करते हैं कि उनका वोट किस उम्‍मीदवार या पार्टी को जाएगा।
  • इसमें मतदाताओं का एक अन्‍य छोटा समूह भी है जिसे 'वेस्‍टर्स यानि व्‍यर्थ' की श्रेणी में रखा जाता है। इसका मतलब है कि ये मतदाता किसी छोटी सी क्षेत्रीय पार्टी या आत्‍मनिर्भर उम्‍मीदवार को अपना मत देकर अपने वोट को खराब कर देते हैं।

    नयी दिशा इस असं‍गठित क्षेत्र को संगठित करेगी
    मतदाताओं के संगठित क्षेत्र में वोटर्स की संख्‍या 33 करोड़ है जो कई समय से एक ही राजनीतिक पार्टी को वोट करते आ रहे हैं। इनमें बीजेपी के हाथ में कुल मतों के आधे वोट हैं और बाकी राजनीतिक पार्टियों के पास आधे वोट जाते हैं।

    यहां एक बात यह गौर करने की है कि, असंगठिच क्षेत्र में योग्य उम्मीदवार 67 प्रतिशत है जो मार्केट में प्रभुत्‍व जमाए पार्टियों से चार गुना ज्‍यादा है। नयी दिशा का उद्देश्‍य इस असंगठित क्षेत्र को एकसाथ लाकर देश में आधुनिक व राजनीतिक बदलाव लाकर, भारत को समृध्द बनाना है।

    संख्‍या और नयी दिशा

    चुनाव के दरम्यान राजनीतिक पार्टियों का मुख्य उद्देश्य मतदाताओं को आकर्षित करना होता है। इसके अलावा वे उन लोगों को भी प्रभावित करने की कोशिश करते है, जिनका वोट किस पार्टी या उम्मीदवार के लिए वह सुनिश्चित नहीं होता। कुछ राजनीतिक पार्टियों के लिए प्रतिबद्ध वोटर्स की पसंद बदलना बेहद मुश्किल है। ये बात भारत में भी लागू होती है।

    नयी दिशा इस सच्‍चाई को समझती है और इसीलिए असंगठित क्षेत्र पर वह ध्‍यान केंद्रित कर रही है जो 67 प्रतिशत है।

    यह कुल स्तर पर है लेकिन जीतने के लिए, लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के स्तर पर क्या होता है, यह ज्‍यादा मायने रखता है। औसत निर्वाचन क्षेत्र में करीब 18 लाख मतदाता होंगे। जीतने के लिए एक उम्‍मीदवार को बहु-क्षेत्रों से 4 से 5 लाख वोटों की जरूरत होगी। नयी दिशा के लिए योग्‍य मतदाताओं के तिमाही वोटर्स को अपने मत को बदलने के लिए प्रभावित करना है।

    नयी दिशा का संदेश

    नयी दिशा का लक्ष्‍य गरीबी दूर कर भारत को समृद्धि के मार्ग पर अग्रसर करना है। पिछले कुछ सालों में सरकार बदली विकास का वादा भी किया, लेकिन वादे सिर्फ वादें बन कर ही रह गए। किसी ने भी उन वादों को पूरा करने की कोशिश नहीं की। हमे यह बात जानना होगा कि देश को इन राजनीतिक पार्टीयों की जरूरत नहीं है, भारत की आम जनता ही देश को समृद्धि के मार्ग पर ले जा सकती है।

    मौलिक समस्या यह है कि ये राजनीतिक पार्टियों द्वारा अनावश्यक हस्तक्षेप कर आम जनता कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता छीन ली जाती है। जिससे समृद्धि की स्थापना के बीच सबसे बड़ी रूकावट राजनीतिक नीतियां है, जो आम जनता को आजादी नहीं मिल पाती।

    अज्ञानता और अयोग्यता की वजह से पार्टियां केवल स्‍वयं के हित के लिए काय करती हैं सरकार की आर्थिक योजना और नीतियां जैसे कि आर्थिक योजना और नीतियां जैसे कि राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम, किसानों को ऋण और किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी लंबे समय तक नहीं चल पाईं। व्यावसायिक गतिविधियों में सरकार का विस्तार या हस्तक्षेप करने से नहीं देश समृध्द बनता है बल्कि आम जनता द्वारा बनाई गई चीजों को भी नष्ट कर देता है। केवल धन पैदा करता है बल्कि वास्तव में व्यक्तियों द्वारा बनाई गई छोटी चीज़ों को नष्ट कर देता है। छोटी नीतियों जैसे सरकारी नौकरियों और शिक्षा में आरक्षण बढ़ाने से लोगों को समृद्ध नहीं बनाया जा सकता है।

    सरकार को बिना किसी हस्तक्षेप के आम जनता को कार्य करने की स्वतंत्रता देनी चाहिए।

    नयी दिशा का लक्ष्‍य और योजना
    नयी दिशा का मुख्य लक्ष्य भारत को आर्थिक आजादी प्रदान कर समृद्धि के मार्ग द्वारा नयी दिशा देनी है। देश को समृध्द बनाने के लिए सबसे पहले आम जनता को आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान कराना महत्वपूर्ण है। हमे यह ज्ञात हो कि देश को समृध्द आम जनता बना सकती है न कि सरकारें। यदि इसी तरह सरकार आन जनता को विभिन्न तरह की पांबदियों से जकड़े रहेगी तो हम कभी भी गरीबी रेखा से बाहर नहीं निकल सकते।

    इसलिए नयी दिशा सबसे पहले आम जनता तक उन पैसों को पहुंचाना चाहती है, जो सरकार ने अपने कब्जे में रखा है। जब देश की जनता को उनके हक का पैसा तब ही देश से गरीबी हटेगी और देश समृध्द होगा।

    भारत की सार्वजनिक संपदा में हर भारतीय परिवार का हिस्सा है, जो वर्तमान में सरकार के नियंत्रण में है। सार्वजनिक संपदा का आम जनता में वितरण होने से उन्हें सशक्त व कुशल बनने, नया व्यवसाय शुरू करने, उपकरण खरीदने आदि के लिए मददगार साबित हो सकता है। इस तरह के वितरण आम जनता को आर्थिक रुप से सक्षम बनाती है साथ ही उनके अपने पैसों को सही तरह से उपयोग करने में सहायता भी प्रदान करती है। इन पैसो की मदद से सरकार को होने वाली हानी तथा अक्षमता को कम किया जा सकेगा। उन सरकारी क्षेत्रों को भी मदद मिल सकेगी, जो वर्तमान में बंद होने के कगार पर हैं। क्योंकि हमारा मानना है किसी भी तरह के व्यवसाय में सरकार का शामिल होना जरूरी नहीं होता। आर्थिक गतिविधियों में सरकारी हस्तक्षेप न्यूनतम होने से उत्पादकता में वृद्धि होती है तथा लोगों को समृध्द बनाने में मददगार साबित होती है।

    प्रतिवर्ष एक परिवार को एक लाख की राशि देकर उन्‍हें गरीबी रेखा से ऊपर उठाया जा सकता है। इन पैसों से लोग अपनी निजी जरूरतें जैसे रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा और सेहत संबंधित आवश्‍यकताओं को पूरा कर सकते हैं। इससे वस्तुओं और सेवाओं की मांग भी बढ़ेगी, नौकरी के अवसर बढ़ेंगें और लोगों की आय में भी बढ़ोत्तरी होगी। यह उत्पादन और उपभोग का शुरुआती चक्र होगा।

    भारतीय परिवारों की प्रतिवर्ष औसत घरेलू आय 1.2 लाख रुपए से कम है। कई मध्य यम परिवारों की कुल आय शून्‍य है। जिससे लाखों लोगों को गरीबी की वजह से उचित स्‍वास्‍थ्‍य सुविधाएं और किसी गंभीर रोग के ईलाज की सुविधा नहीं मिल पाती है। प्रतिवर्ष एक लाख रुपए के रिटर्न की गारंटी देकर सरकार देश की गरीब जनता की मदद कर उनके जीवन को सुधार सकती है।

    इसके साथ ही नयी दिशा सभी तरह के करों को घटा कर 10 प्रतिशत तक ही सीमित करना चाहती है।

    इस रणनीतिक कदम के दो फायदे होंगें। पहला, इससे लोगों के हाथ में ज्‍यादा पैसा आएगा और वो अपनी जरूरतों को पूरा कर पाएंगें। वर्तमान समय में गैरजरूरी टैक्‍स लगाकर सरकार लोगों की आय का एक बड़ा हिस्‍सा अपने कब्जे में कर लेती है।

    नयी दिशा का नारा : तुम बढ़ोगे, देश बढ़ेगा
    अब समय आ गया है जब सरकार से ध्‍यान हटाकर लोगों के विकास पर गौर करना चाहिए। तुम बढ़ोगे, देश बढ़ेगा, का नारा काफी सरल और सकारात्‍मक संदेश देता है। यही संदेश देश के 67 करोड़ मतदाताओं तक पहुंचाना है।

    नयी दिशा का मंच

    भारत में सदियों से राजनीतिक दल श्रेणीबद्ध तरीके से ही कार्य करते आय़ा है। वर्तमान की राजनीति में ऊंचे पद पर बैठे मंत्री से निचले पद के अफसरों तक शक्‍ति और शासन का प्रवाह हो रहा है। जिससे सत्ता में आसीन बहुत कम लोग देश को चलाने के लिए महत्वपूर्ण निर्णय ले रहे हैं।

    निचले पदों पर आसीन अफसरों का थोड़ा प्रभाव जरुर पड़ता है कि वर्तमान में क्या चल रहा है जानने हेतु। विशेषकर चुनाव के दरम्यान उम्मीदार का चयन करते समय। यह लोकतंत्र के विचार विपरीत है कि चुनाव में खड़े होनेवाला उम्मीदवार आम जनता का प्रतिनिधि न होकर राजनीतिक पार्टियों द्वारा चुना जाता है। जो आम जनता पर चुनाव को देखते हुए प्रभावित करने की कोशिश करता है।

    इससे भ्रष्‍टाचार को बढ़ावा मिलता है। पार्टियां ऐसे उम्‍मीदवारों को चुनती हैं जो पार्टी की टिकट के लिए सबसे ज्‍यादा पैसा देता है। योग्यता, नैतिकका और नैतिक सत्य, परिश्रम और उम्मीदवार की चेतना पर विचार नहीं किया जाता है। इससे सरकार तो खराब बनती ही है साथ ही वो नीतियां भी ऐसी बनाते हैं जिससे देश का विकास धीमा हो।

    नयी दिशा इस मॉडल को बदलना चाहती है और ऊपर से नीचे की जगह से नीचे ऊपर की ओर पॉवर का प्रवाह लाना चाहती है। नयी दिशा के मंच पर लोगों द्वारा चुने गए उम्‍मीदवारों की आवाज़ को बुलंद किया जाएगा।

    नेटवर्क और अनुक्रम
    कुछ संस्‍थाओं में ऊपरे से नीचे की ओर नियंत्रण होना जरूरी है। जैसे कि सेना और कॉर्पोरेशन में पॉवर उच्‍च स्‍तर के अधिकारियों के पास ही होनी चाहिए। यहां आदेश ऊपर से मध्‍यम स्‍तर के अधिकारियों तक पहुंचना चाहिए। लेकिन जब बात लोकतंत्र की हो पावर का प्रवाह आम जनता से नेताओं को होना चाहिए, न कि नेताओं से जनता की ओर। क्योंकि आम जनता ने नेताओं को चुना है, इसलिए पावर रखने का अधिकार भी आम जनता के हाथों में होना चाहिए।

    आज की तकनीक ऐसी होनी चाहिए जिससे लोगों की भलाई हो। यदि आम जनता को उनके आधार पर अपने लिए कुछ करने मिले तो जनता का सशक्तिकरण हो पाएगा। स्‍वयं अपने कुछ चुनने के अधिकार से जनता का सशक्‍तिकरण किया जा सकता है। लेकिन राजनीतिक पार्टियां अपनी पॉवर को लोगों के हाथों में देने के लिए इतनी आसानी से तैयार नहीं होंगीं। बस, यहीं नयी दिशा राजनीतिक मंच के रूप में एक महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस मंच पर लोग पहली बार अपनी पसंद का उम्‍मीदवार चुन सकते हैं।

    नयी दिशा के राजनीतिक मंच द्वारा जनता पारदर्शी वोटिंग प्रक्रिया से अपनी पसंद के उम्‍मीदवार को चुनकर खुद अपना भविष्‍य तय कर सकती है।

    नयी दिशा के प्‍लेटफॉर्म और पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों में अंतर
    चुनाव प्रचार के लिए धन एकत्रित करने, उम्‍मीदवारों के चयन और संगठनात्‍मक संरचना से लेकर सब कुछ - नयी दिशा प्‍लेटफॉर्म और राजनीतिक पार्टियों के बीच चॉक और चीज़ का अंतर है। ये अंतर व्‍यापक और मौलिक है।

    नयी दिशा का प्राइमरी मॉडल

    मोबाइल नेटवर्क से नयी दिशा के मंच को पॉवर मिलेगी। लगभग देश के हर नागरिक के पास मोबाइल फोन है तथा इनमें से आधी से ज्यादा आबादी मोबाइल फोन पर इंटरनेट यूज़ करती है। इसका मतलब है कि हर इंसान अपने दोस्‍तों और परिवार से जुड़ा हुआ है।

    नयी दिशा के मंच से सदस्यों को यह पता करने का अधिकार मिलता है कि वे एक ऐसे आंदोलन का हिस्सा हैं जो, शासन में परिवर्तन लाने की ओर अग्रसर है। मेंबरशिप डाटा के तहत आम जनता के समर्थन के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त होगी।

    नयी दिशा के सदस्‍य
    कोई भी मतदाता नयी दिशा का सदस्‍य बन सकता है। इसके लिए आपको अपने पहचान पत्र के साथ साइन अप करना होगा। साइन अप करने का मतलब है कि आप नयी दिशा के सिद्धांतों को स्‍वीकार करते हैं। प्रत्‍येक नयी दिशा के सदस्‍य को तीन संबंधित संख्याएं दी जाएंगीं:

  • यह नयी दिशा में शामिल होने के आदेश को इंगित करेगा। प्रारंभिक सहभागी के पास सदस्यता संख्या कम होगी।
  • रेफरल संख्याएं: यह दर्शाता है कि सदस्य द्वारा नयी दिशा को फॉलो करने के लिए कितने अन्य लोगों को भेजा गया था।
  • यह भागीदारी के बारे में बताएगा।
  • मेंबर एक्टिविटी में आप अपनी बात को लोगों के साथ साझा कर सकते हैं और जो लोग अब तक नयी दिशा से नहीं जुड़ पाए हैं उन्‍हें भी रजिस्‍टर करने के लिए बुला सकते हैं। नयी दिशा से जुड़ने वाले सदस्‍यों की सबसे बड़ी जिम्‍मेदारी उनके निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ने के लिए सही उम्‍मीदवार को चुनना है।

    नयी दिशा के उम्‍मीदवार
    पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों में उम्‍मीदवार शीर्ष के नेताओं द्वारा चुने जाते हैं और चुनाव के कुछ दिन पहले ही उम्‍मीदवारों के नाम का खुलासा किया जाता है। ऐसे में लोगों की पसंद का ध्‍यान बहुत कम रखा जाता है। नयी दिशा के मॉडल में नागरिक खुद अपने निर्वाचन क्षेत्र से अपने पसंदीदा उम्‍मीदवार को चुनकर आगे चुनाव के लिए भेज सकते हैं।

    नयी दिशा का मंच यह तय नहीं करता कि कौन व्‍यक्‍ति चुनाव लड़ सकता है और कौन नहीं। नयी दिशा का कोई भी सदस्‍य प्रतियोगिता में हिस्‍सा ले सकता है। नयी दिशा से जुड़ने वाला हर सदस्य इसकी नीतियों से भी सहमत होगा और इनका समर्थन करता होगा।

    नयी दिशा की प्राथमिकताएं
    नयी दिशा के मंच पर पहले सदस्‍यों द्वारा चुने गए उम्‍मीदवारों के लिए आंतरिक चुनाव होंगें। नयी दिशा ब‍हुमत के साथ देश का एक नयी दिशा देने की ओर अग्रसर है। नयी दिशा के सदस्‍य ना केवल लोक सभा के सदस्‍यों को चयनित करने के योग्‍य होंगें बल्कि उन्‍हें प्रधानमंत्री चुनने का भी अधिकार मिलेगा।

    अपने तीन नंबरों से उम्‍मीदवारों के बारे में सब कुछ जान सकते हैं और उनका मूल्‍यांकन भी कर सकते हैं। इतना ही नहीं इस मंच पर उम्मीदवारों के बारे में अपने विचार भी व्‍यक्‍त कर सकते हैं।

    प्राइमरीज़ के लिए पूर्व शर्त यह है कि एक निर्वाचन क्षेत्र से केवल 5 प्रतिशत मतदाता ही नयी दिशा पर रजिस्‍टर कर सकते हैं। ऐसा भी हो सकता है कि अन्‍य राजनीतिक पार्टियों के समर्थक चुनाव की प्रक्रिया को बाधित करने के लिए नयी दिशा पर साइन अप करें। इसलिए 5% तक की सीमा रखने से गड़बड़ी की संभवाना कम हो सकती है। इस प्रक्रिया को पूरी तरह से पारदर्शी रखा गया है।

    नयी दिशा में भी बूथ स्‍तर पर निगम / पंचायत और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों, और लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के लिए आंतरिक चुनाव होते हैं। इस कार्यक्रम में उम्‍मीदवार बहुमत से लोक सभा में जीतकर, नयी दिशा के सदस्‍य अपने चुने हुए सांसदों से भारत के अगले प्रधानमंत्री का चयन करने के लिए मतदान करेंगे।

    प्राइमरी मॉडल के ज़रिए नयी दिशा सरकार के सभी स्‍तर पर बदलाव लाएगी।

    सारांश : नयी दिशा - हर भारतीय के लिए एक नयी दिशा है।

    नयी दिशा देश को स्‍वतंत्र और समृध्द बनाने की ओर अग्रसर एक मंच प्रदान करता है। आम जनता के साथ-साथ देश को समृद्ध बनाने के लिए सबसे पहली जरूरत है स्‍वतंत्रता की। संपन्‍न देशों के नागरिक पूर्ण रूप से स्‍वतंत्र होते हैं। ऐसा कोई भी संपन्‍न देश नहीं है, जिसके नागिरकों के पास स्‍वतंत्रता नहीं है।

    नयी दिशा इसी तथ्‍य को मानता है। वास्‍तविक रूप से भारतीयों की स्‍वतंत्रता सरकार का हर क्षेत्र में नियंत्रण खत्‍म कर पाई जा सकती है। भारत में ना‍गरिकों को ये स्‍वतंत्रता पारंपरिक राजनीतिक पार्टियों से मिल पाना बहुत मुश्किल है। इसलिए हमने एक ऐसा मंच तैयार किया है जहां आप खुद अपनी पसंद का उम्‍मीवार चुन कर अपने लिए आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक स्‍वतंत्रता निश्चित कर सकते हैं।

    नयी दिशा राजनीतिक मंच है जो, भारत को स्‍वतंत्र देखना चाहता है और इसे विकसित और संपन्‍न देश बनाना चाहता है। यहां पर मतदाताओं को प्राथमिकता दी जाती है और चुनाव की प्रक्रिया को केंद्र में रखा जाता है।

    नयी दिशा सरकार के कब्जे से उन पैसों को उसके सही हकदार यानि आम जनता तक पहुंचाना चाहती है। जनता खुद अपना उम्‍मीदवार चुनकर अपना भविष्‍य और स्‍वतंत्रता निर्धारित कर सकती है। भारत में हर राजनीतिक पार्टी का मुख्य लक्ष्य सरकार में आकर हर क्षेत्र में अपनी हस्तक्षेप को बढ़ावा देना है तथा आम जनता की स्वतंत्रता कम करनी है, लेकिन अब और नहीं।

    हर भारतीय को नयी दिशा का संदेश है : ' आपकी आजादी मतलब आपकी समृद्धि'। आपकी समृद्धि का मतलब है देश की शांति। सरकार आपकी स्‍वतंत्रता का रोड़ा है और इस तरह ये देश की स्‍वतंत्रता में भी बाधा है। आपको एक दमनकारी सरकार से स्वतंत्रता की आवश्यकता है। आप अपने मत के अधिकार से किसी ऐसे उम्‍मीदवार को चुनकर सरकार बना सकते हैं जो स्‍वतंत्रता और देश मे शांति की स्‍थापना का समर्थक हो।

    ये समय आपके उदय का है क्‍योंकि 'तुम बढ़ोगे, देश बढ़ेगा।'

    क्या हमारे लिए प्रश्न हैं ?