तुम्हारा ना जन्म ना मृत्यु,
नाश ना विनाश,
तुम तो अमृत के संतान हो,
तुम्हें किस बात का डर है ?

- स्वामी विवेकानंद

कथन का उद्देश्य

राजेश जैन

मूल रूप से, मैं एक उद्यमी हूं। कहने का आशय यह है कि एक उद्यमी का मुख्य कार्य है, बिखरी हुई चीजों को एकजुट कर एक नया रूप प्रदान करना। किसी भी वस्तु को नया रूप देने से उसके मूल्य में वृद्धि होती है।

एक प्रौद्योगिकी उद्यमी के रूप में मैंने जो कुछ चाहा उसे पाया- जिससे मैं समाज में कुछ बदलाव ला सकूं। परिणामस्वरूप व्यक्तिगत सफलता उसी का प्रभाव था। लेकिन व्यक्तिगत सफलता ही मेरी प्राथमिकता नहीं थी।

आम जनता किसी भी चीज में बदलाव तब ही चाहती है, जब उन्हें किसी वस्तु विशेष से संतुष्टि नहीं मिल पाती। लेकिन असंतुष्ट होने से मुझे इस बात का एहसास हुआ कि भारतीय अब तक वह चीजें हासिल नहीं कर पाएं जिसके वह असली हकदार हैं। अन्य संपन्न देशों की तरह भारत में भी सभी जरूरी साधन-संपदा उपल्बध हैं, जिससे हम समृद्ध देश की सूची में शामिल हो सकते हैं। फिर भी भारत वहां नहीं है जहां इसे होना चाहिए। आज भी लाखों भारतीय गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे हैं। मुझे विश्वास है कि हम सब देश में आवश्यक बदलाव जरूर ला सकते हैं।

हम सभी के अपने कुछ सपने, लक्ष्य और महत्वाकांक्षाएं हैं। मेरी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है क्योंकि मैं राजनीतिज्ञ नहीं उद्यमी हूं। मेरा सपना, मेरा लक्ष्य और मेरी महत्वकांक्षा अपने भारत देश को समृद्ध देखना है। एक उद्यमी होने के नाते, मैं जानता हूं, हम उसे प्राप्त करने योग्य हैं। और मुझे इस बात का विश्वास है कि मैं यह जानता हूं कि देश को समृद्धि की ओर ले जाने के लिए हमें क्या करना होगा।

ऐसा क्या है जो देश को समृद्धि की ओर बढ़ने से रोक रहा है। तो मेरे अनुसार वह है- भारत सरकार की कार्यप्रणाली जो आम जनता की आजादी को नियंत्रित करती है। यह एक ऐसा सिस्टम है, जिसने आम जनता को एक सेवक बना रखा है। सरकार आम जनता के हित से ज्यादा अपने हित के बारे में सोचती है। पर अब समय आ गया है कि इस तरह की कार्य प्रणाली को जड़ से समाप्त किया जाए। सिर्फ राजनीतिक पार्टी या सरकार में बदलाव नहीं बल्कि हमें सिस्टम में बदलाव लाना होगा।

साथ में हम जरुर मौजूदा सिस्टम में बदलाव ला सकते हैं। हमारी लड़ाई किसी विशेष नेता या राजनीतिक पार्टी से नहीं है। हमारी लड़ाई हर उस सरकार की कार्यप्रणाली व नीतियों से जो आम जनता की आजादी को छीनती है।

मैं स्वामी विवेकानंद के वक्तव्य से सहमत हूँ कि-

तुम्हारा ना जन्म ना मृत्यु,

नाश न विनाश,

तुम तो अमृत के संतान हो,

तुम्हें किस बात का डर है ?

हम अविनाशी और अमर हैं। हमें किसी भी बात से डरने की जरूरत नहीं है। इसमें कोई दो राय नहीं, हम पर शासन करने वाले शक्तिशाली हैं पर एक साथ मिलकर हम उनसे भी ज्यादा शक्तिशाली बन सकते हैं।

एक साथ मिलकर समृद्धि की ओर बढ़ने के लिए हम एक नई राह बना सकते है। हम देश को नयी दिशा में ले जा सकते हैं। यह हमारा अधिकार है औऱ आने वाली नई पीढ़ी का भी।

राजेश जैन से मिलिए

We can make India prosperous. The future of over 130 crore Indians depends on what we do today. Let us not waste any more time. Join Nayi Disha.

एक प्रौद्योगिकी उद्यमी और एशिया के डॉटकॉम क्रांति में अग्रणी, राजेश ने 1990 के दशक के अंत में भारत का पहला इंटरनेट पोर्टल बनाया। उन्होंने तब शुरू किया, जो आज की भारत की सबसे बड़ी डिजिटल मार्केटिंग कंपनी है। राजेश एक उद्यमी रहे हैं, लेकिन एक अलग डोमेन में - राष्ट्र निर्माण।