पॉलिटिक्स विथाउट रोमांस

मुझे हमेशा से लगता था कि, हमारी समस्याओं को हल करने की जिम्मेदारी सरकार की है। इतना ही नहीं मैंने हमेशा सोचा कि सरकार अंनत धन और शक्ति के साथ लोगों के हित में कार्य करनेवाली महान दाता है। जबकि सरकार द्वारा किए गए सभी कार्यों के परिणाम अवमानक या घटिया थे फिर भी मुझे विश्वास था कि सरकार ही बदलाव लाने का एक जरिया है। मेरे विचार तब पूरी तरह से बदल गए जब मैं सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी द्वारा आयोजित एक वर्क शॉप में पार्थ शाह की पब्लिक चॉइस से अवगत हुआ। यह मेरे लिए एक नए कांच की तरह था, जिससे आप राजनीति और राजनीतिक व्यवहार को समझा जा सके तथा अर्थव्यवस्था पर लागू किया जा सके।

राजनेता व सरकारी नौकरशाह जनहित में निस्वार्थ भाव से कार्य करने वाले संत नहीं है। राजनेता व सरकारी नौकरशाह हमसे ज्यादा समझदार नहीं कि वे जानते हैं कि क्या अच्छा, सुंदर व सत्य है। वे भी हमारे तरह ही स्वार्थ से निहित है। वे वैध या अनुचित तरीके से अपनी शक्ति बढ़ाने का प्रयास करते हैं। किसी भी व्यक्ति का स्वभाव समान ही रहता है और ऐसा बिलकुल नहीं है कि किसी पद पर आसीन होने पर उसमें कुछ बदलाव आते हैं। अचानक से जवाब स्पष्ट है, इसमें कोई दो राय नहीं है कि मुख्य रूप से हर राजनेता की दिलचस्पी सत्ता में बने रहना है। इसके अलावा सरकारी नौकरशाह अपने संपत्ति को हर संभव तरीके से बढ़ाने के लिए लगे रहते हैं। एक विशेष समूह अपने फायदे के लिए कड़ी मेहनत करेंगे – क्योंकि वे अपने लाभों को हर हाल में ध्यान में रख सकते हैं। बेशक मतदाता अपने स्वार्थ के लिए ही राजनेताओं को अपना मत देगा। इसके अलावा कई ऐसे लोग है जो कभी मतदान करने के लिए नहीं सोचते-क्योंकि है कि उनके अकेले के मतदान नहीं देने से परिणामों में कोई बदलाव नहीं आएगा।

भारतीय राजनेताओं के आधार पर औसतन मतदाता गरीब, ग्रामीण निवासी व किसान है। लेकिन वास्तविकता यह है कि लगभग 50 प्रतिशत भारतीय शहरों में रहते हैं। फिर भी राजनेताओं को लगता है कि देश की अधिकांश जनसंख्या गांव में निवास करती है और सरकार को गरीबों की सहायता करने के लिए हस्तक्षेप करना चाहिए साथ ही आर्थिक विकास के लिए बदलाव का पीछा करना निर्वाचन प्रक्रिया के लिए हानिकारक हो सकता है। यह सभी देश की सभी सरकारों के लिए लागू किया जाता है-केंद्र सरकार, राज्य सरकार और यहां तक की स्थानीय सरकार। निर्वाचन प्रकिया हो या नहों, सरकार का विकास होता है तथा अधितकर समस्याएं अनसुलझी रह जाती है, जीवन ऐसे ही आगे बढ़ता चला जाता है। लेकिन परिणामों और नियमों में तब तक बदलाव नहीं आएंगे जब तक शासकों में कोई बदलाव नहीं होता।

नोट- पालिटिक्स विथआउट रोमांस जेम्स बुकनन और गॉर्डन टूलॉक द्वारा पेपर है। जिसमें पब्लिक चॉइस व सरकार की असफलता के बारे में बताया गया है।