तुम बढ़ोगे, देश बढ़ेगा

भारत कभी भी एक गरीब देश नहीं था। इतिहास के पन्नों को देखा जाए तो हमें पता चलेगा कि भारत ने हमेशा से विश्व के व्यापारियों और आक्रमणकारियों को आकर्षित किया है। 1947 में जब देश को आजादी मिली तब लोगों को इस बात की उम्मीद जगी थी कि देश में गरीबी हटेगी व संपन्नता आएगी।

जैसा कि हम सब जानते हैं कि देश के शासक तो बदले, लेकिन नियम में बदलाव नहीं आए। जिसके कारण आज भी भारत की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। यदि हम देश की अब तक की स्थिति पर नजर डालें तो कुछ भी नहीं बदला है। भारत आजादी के समय भी गरीब था और आज भी गरीब ही है। ब्रिटिश सरकार के बाद देश की विभिन्न सरकारों ने देश की संपत्ति और शक्ति को खत्म किया है। नियम से नियम,विनियमन से विनियमन, अध्यादेश से अध्यादेश, फैसले से निर्णय, नीति के आधार पर नीति, साल दर साल,वे दुनिया की सबसे बड़ी समृद्ध विरोधी नीतियों का ही निर्माण करते रहे हैं।

अब इसका अंत होना जरूरी है और इसका अंत होने का समय भी आ गया है। और यह दो आसान तरीकों से संभव है- पहला यह कि हर भारतीय परिवार को सार्वजनिक संपत्ति में से कुछ हिस्सा मिलना चाहिए। जो हर साल एक परिवार को 1 लाख रूपये के रूप में दिया जा सकता है तथा सभी प्रकार के करों यानि टैक्स को 10 प्रतिशत तक सीमित कर देना चाहिए। आम जनता के हाथ में अधिक पैसे आने से वे अपने लिए बेहतर सुविधाओं का लाभ उठा सकते हैं। जिससे देश में गरीबी हटेगी, नए रोजगारों के अवसर पैदा होंगे और आम जनता के साथ-साथ देश का भी विकास होगा।

हां, लेकिन जो लोग सत्ता में हैं वे इस दिशा में बिलकुल भी कार्य नहीं करेंगे। इसलिए नयी दिशा की आवश्यकता है, जो एक राजनीतिक स्‍टार्टअप है। देश के 67 करोड़ मतदाता, एंटी प्रोस्‍पैरिटी मशीन के प्रति ईमानदार नहीं हैं और हमें इन्‍हीं मतदाताओं को नयी दिशा से जोड़ना है। अगर हम में से 20 करोड़ लोग भी एकसाथ आ जाएं तो हम बदलाव ला सकते हैं।

नयी दिशा देश को समृद्धि की दिशा में लेना जाना चाहती है।

अब समय आ गया है कि हम आगे आकर अपने भविष्‍य के लिए बदलाव लाए। नयी दिशा एक ऐसा ही मंच पर है जिस पर आप पहले राजनीतिक और फिर आर्थिक क्रांति लाकर भारतीयों की जरूरत को पूरा कर सकते हैं। हमें सही हाथों में संपन्‍नता और शक्ति को देना है। क्‍या आप तैयार हैं? क्‍योंकि ‘’तुम बढ़ोगे, देश बढ़ेगा’’।