तलाश हैः भारत के पहले समृद्धि प्रधानमंत्री की- भाग1

अगले 14 महीनों में भारत में आम चुनाव के लिए मतदान होंगे। जैसा दिखाई दे रहा है, लोकसभा की 330 सीटों पर, या तो भाजपा का उम्मीदवार जीतेगा या कांग्रेस का। बाकी की बची हुई सीटें प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों के खाते में जाएगी। कांग्रेस और भाजपा के सुधारों को देखते हुए कहा जा सकता है, कि अगला प्रधानमंत्री इन्हीं दो पार्टियों मे से कोई एक होगा।

अगले 14 महीनों में भारत में आम चुनाव के लिए मतदान होंगे। जैसा दिखाई दे रहा है, लोकसभा की 330 सीटों पर, या तो भाजपा का उम्मीदवार जीतेगा या कांग्रेस का। बाकी की बची हुई सीटें प्रमुख क्षेत्रीय पार्टियों के खाते में जाएगी। कांग्रेस और भाजपा के सुधारों को देखते हुए कहा जा सकता है कि अगला प्रधानमंत्री इन्हीं दो पार्टियों मे से कोई एक होगा। (वर्तमान पसंदीदा मोदी के रूप में)।

जैसा कि अक्सर होता है चुनाव आश्चर्य जनक होते हैं – और प्रधानमंत्री किसी अन्य गठबंधन से हो सकता है। इसलिए अगले चुनाव के बाद नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी या कोई और अगला प्रधानमंत्री बन सकता है। विभिन्न परिस्थितियों में विभिन्न संभावनाएं देखी जा सकती है और वह खेल गंभीरता के साथ शुरू हो चुका है। प्रधानमंत्री का पद देश का सबसे महत्तवपूर्ण पद है। प्रधानमंत्री की कार्यशैली हमारे देश का भविष्य निर्धारित करती है।

इसलिए, यह समय सही है इस बात पर चर्चा करने के लिए कि भारत को किस तरह के प्रधानमंत्री की आवश्यकता है। अब तक, अधितकर चुनाव एक विशिष्ट पार्टी को मतदान देने तक ही सीमित रहे हैं। लेकिन हाल के चुनाव में, दिल्ली में किसे अपना नेता बनाना है इस विषय पर जनता ने काफी सोच विचार से निर्णय लिया है।

वर्तमान प्रधानमंत्री के रूप में क्या नरेंद्र मोदी एक बार फिर मतदाताओं से मजबुत जनादेश की मांग करेंगे। ऐसी भी संभावना है कि राहुल गांधी दावेदार होंगे तथा आम जनता से देश के नेतृत्व में बदलाव की मांग करेंगे। दोनों पार्टियों के पास उनके ताकतवार नेता व आक्रामक प्रचार अभियान होंगे। साथ ही उनके पास उनका विस्तृत घोषणापत्र भी होगा।

भाजपा अपनी उपलब्धियों के बारे में बात करेगी और साथ ही 1947 से लेकर कांग्रेस के 55 साल के ट्रेक रिकॉर्ड की आलोचना करेगी। कांग्रेस भाजपा के झुठे वादों को लक्ष्य बनाते हुए उनके द्वारा की गई गलतियों पर लोगों का ध्यान केंद्रित करेगी। जनता को एक और मल्ल युद्ध देखने को मिलेगा। आए दिन कुछ बयानों का बढ़ा-चढ़ाकर व्हाट्सएप के माध्यम से लोगों के बीच वितरित किया जाएगा और यह तब ही आएंगे जब हमें चुनाव करना होगा।

अगला चुनाव आने तक-एक राष्ट्र के रूप में हम कुछ और साल जाते हुए देखेंगे – पिछले बहुत से खोए हुए सालों की तरह, अवसरहीन साल और वह साल जो हमें समृद्धि से और दूर ले जाएंगे। यह चक्र कब बंद होगा?